शनिवार, 29 जनवरी 2011

जहाँ निष्ठुरता आवश्यक है……………


एक बार यात्रा में, हम दो मित्र शाकाहार- मांसाहार पर चर्चा कर रहे थे। मित्र नें कहा यार लोग किसी जीवित प्राणी को मारकर कैसे खा लेते होंगे? यह तो क्रूरता है। सामने सीट पर बैठे दो मित्र हमारी चर्चा को ध्यान से सुन रहे थे, मांसाहार समर्थक थे, निर्दयता वाला वाक्य उन्हे नागवार गुजर रहा था। हमें निरुत्तर करने के उद्देश्य से बडा सम्वेदनशील प्रश्न उछाला “आप मांसाहार करने वालो को राक्षस कहते हो, हमारे देश की रक्षा करने वाले वीर सैनिक भी मांसाहार करते है, आपने सैनिको को राक्षस क्यों कहा?

आचानक मुँहगोले की फैके गए प्रश्न पर हमें हतप्रभ देखकर एक क्षण के लिये उनके चहरो पर कुटिल मुस्कान तैर गई। हमने उनकी मंशा को परखते हुए कहा- देखो दोस्त, हमारे मुंह में शब्द न ठूसो, हालांकि सेना में आहार सैनिक की व्यक्तिगत पसंद होता है, फिर भी यदि किसी सैनिक के मन में यह भ्रांत धारणा हो कि माँसाहार से निष्ठुरता आती है तब तो  मांसाहार हमारे ही तर्क की पुष्ठि ही कर रहा है, वे यह मानकर मांसाहार कर रहे है कि उनमें शत्रु के प्रति क्रूर निष्ठुर भाव बने रहे, कहीं शत्रुओं को देखकर उनमें दया-करूणा के भाव न आ जाय। ताकि वे दुश्मनो पर राक्षस की तरह टूट पडें। इस तर्क से तो इस बात को बल मिलता है कि मांसाहार से क्रूर निष्ठूर भाव उपजने की सम्भावनाएं अधिक है। तर्क के लिए तो यह बात ठीक है किन्तु यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सेना में निष्ठुरता वीरता और बलवृद्धि के लिए माँसाहार प्रयोग होता है। सच्चाई तो यह है कि आहार शैली सैनिकों का स्वतंत्र और नितांत ही निजि  निर्णय होता है।

सेना के आहार में अंडे व मांस कोई अनिवार्यता नहीं है, अतीत में कईं शाकाहारी योद्धाओं नें शत्रुओं से लोहा लिया है और आज भी कईं शाकाहारी वीर सैन्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते है। निसंदेह वे  शक्तिशाली और पर्याप्त पोषण अपने शाकाहारी पदार्थो से बखुबी प्राप्त करते है। बस युद्धभूमि में शत्रु के प्रति निष्ठुरता एक अनिवार्य विवेक है जो कि प्रत्येक वीर का साहसी गुण है।

27 टिप्‍पणियां:

  1. सेना में मांस व अंडे का आहार अनिवार्यता नहीं है, प्रोटीन वे दालों से भी पा लेते है।
    सत्य वचन। मेरा ऐसे अनेकों सनिकों से परिचय रहा है जिन्होंने जीवन में कभी भी मांस नहीं खाया और न शराब छुई।

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  2. वैसे ऐसे अनेकों शराबियों और मांसाहारियों को भी जानता हूँ जिनका जीवन देश के काम आने के बजाय बातें बनाने में ही बीतता है। अभिप्राय यह है कि किसी भी व्यवसाय के लिये मांसाहार की कोई अनिवार्यता नहीं है - विशेषकर आज के वैज्ञानिक युग में।

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  3. सेना में मांसाहार और शराब कोई आवश्यक नहीं है। जिन्हे मांसाहार करना है और शराब पीना है उनके लिए हजार बहाने हैं।

    लेकिन एक बात सत्य है, अनजान शत्रु पर गोली चलाने के लिए नशे के साथ क्रूर भी बनना पड़ता है।

    जिसके साथ आपकी कोइ व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, जिसे आप जानते तक नहीं हैं। उस पर हमला करने के लिए बुद्धि व विवेक को किनारे रखना पड़ता है।

    हमला करने के लिए उन्माद की आवश्यकता होती है।

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    शत्रु पर आक्रमण के लिये क्रोध को उत्तेजित करने की आवश्यकता होती है. जिसके लिये मांसाहार की कतई आवश्यकता नहीं होती.

    यदि सैनिकों के पास कुछ ओजस्वी कमांडर हों अथवा दृढ नैतिक चरित्र वाले ट्रेनर हों अथवा कुछ उनके मनोरंजन में राष्ट्रीयता परोसी जाये और गद्दारी के लिये नफरत भरी जाये तो मुझे पक्का विश्वास है कि वे केवल चने और पपीते खा कर भी शत्रु-वध कर सकते हैं. यह सच है कि आमिष आहार [मांस और शराब] से व्यक्ति क्रूर बनता है लेकिन यह सच नहीं कि वे बहादुर और हिम्मती हो जाता है. वह केवल कसाई हो सकता है क्रूरता से दुश्मन को एक गोली की बजाय बीस गोली ठोंक सकता है. ऐसे सैनिक अपनी क्रूरता को वीरता का खोल पहनाकर प्रदर्शित करते हैं.

    फिर भी आपने एक खोखले तर्क को खारिज करके वास्तविकता की ओर सोचने को हमारे कदम बढ़ा दिए हैं.... बहुतेरों को तो ये उत्तर भी नहीं सूझते. . कमाल है आपका चिंतन और तर्क.

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  5. .

    जब मैं अपने स्कूली जीवन में NCC में था तब सोचा करता था कि यदि मैं सैनिक बना तो मैं अपने सैनिक साथियों को बाहरी शत्रु के खिलाफ और देश के भीतर छिपे गद्दारों के खिलाफ जोश भरा करूँगा.
    मैं आज भी सोचता हूँ कि मुझे सेना में दस-पंद्रह दिन में एक प्रस्तुति [presentation] मिल जाये बस. कर लूँगा अपने मन की. विषयांतर हो जाता हूँ जब भी शाकाहार की बात छिड़ती है.
    क्योंकि मैं हमेशा देशप्रेम को शाकाहार से जोड़कर देखता हूँ.

    मित्र सुज्ञ ही,
    इस पर शोध होना चाहिए कि जो शाकाहार करते हैं उनके समस्त कार्य अपेक्षाकृत देश-सापेक्ष होते हैं. वे सौहार्द बनाने के नाम पर समझोते की बोली नहीं बोलते.

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  6. हम सब पहले मांसाहार थे, यानि पुरा परिवार, फ़िर कुछ ऎस देखा कि हम सब शाका हारी बन गये, कोई माने या ना माने शाका हारी बनने के बाद हमारे स्व्भाव ओर हमारी सेहत मे दिन रात का फ़र्क आया,बाकी खाने वाले तो खने के लिये बहुत बहाने बनाते हे, हम ने इन गोरो को भी शाका हारी बना दिया जो हमारे साथी थे, जो सुबह से ले कर रात के खाने तक मे सिर्फ़ मीट ही खाते थे..... जब कि यहां मीट सस्ता हे ओर सबजियां महंगी हे

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  7. मैं इस बात से सहमत हूँ की निष्ठुरता के लिए मांस भक्षण या मद्यपान कतई आवश्यक नहीं है. मैंने बहुत से ऐसे लोग देखे हैं जो लहुसन प्याज तक नहीं छूते पर निष्ठुरता में किसी से कम नहीं हैं. सुज्ञ जी आपके इस ब्लॉग का मैं स्वागत करता हूँ.

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  8. बहुत सटीक जवाब था महोदय को...
    मेरे बड़े भाई भी सेना में हैं... लेकिन आजतक न तो उन्होंने मांस और न मदिरा को हाथ लगाया है... बाकी तो हज़ार बहाने हैं

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  9. विटामिन B 12 मिलता है केवल मांस से और इसकी कमी से अल्झाइमर नामक बीमारी हो जाती है । इसीलिए विश्व स्तर पर संतुलित आहार की तालिका में मांस को भी शामिल किया गया है। कुछ आवश्यक तत्व ऐसे हैं जो सब्ज़ियों से नहीं मिल पाते।
    अपने देशवासियों को मज़बूत और सेहतमंद बनाने के लिए हमें संतुलित आहार करना चाहिए।

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  10. @ विटामिन B 12 मिलता है केवल मांस से और इसकी कमी से अल्झाइमर नामक बीमारी हो जाती है

    1. यह बात एकदम गलत है। विटामिन B12 कुछ विशेष जीवाणुओं द्वारा शरीर में बनाया जाता है। जो जीवाणु इसे पशु शरीर में बना सकते हैं वही मानव शरीर में भी बना सकते हैं। यह माता के दूध से भी बच्चे के शरीर में पहुँचता है और इसकी नगण्य मात्रा भी लम्बे समय तक शरीर में अपना काम बखूबी कर सकती है। भारतीय तरीके के दुग्ध-शाकाहारियों को बी12 की कमी की सम्भावना न के बराबर है। इसके अलावा कई प्रकार के खमीरों में पाया जाता है और बाज़ार में उपलब्ध बहुत से सीरियल्स में यह यीस्ट स्रोतों से मिलाया जाता है। यह पन्द्रहवीं शताब्दी नहीं है और पशु-हिंसा के उद्देश्य से ऐसा झूठा भय पैदा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

    2. अगर अल्झाइमर के बारे में आपकी बात में रत्ती भर भी दम होता तो अमेरिका और यूरोप के बजाय भारत और सीरिया के लोग इस बीमारी से परेशान घूम रहे होते। अल्ज़ाइमर बढती आयु से सम्बन्धित बीमारी है और इसके अनेकों सम्भावित कारण हैं जिनमें आनुवंशिकता भी एक है।

    सच यह है कि वीगन लोगों को (मेनका गान्धी टाइप का मॉडर्न - गैर-भारतीय शाकाहार) करने वालों को बी12 की कमी की सम्भावना रहती है परंतु लैक्टो-वेजीटेरियंस को नहीं। मैं ऐसे कुछ लोगों को जानता हूँ जो मांसाहारी होते हुए भी बी-12 की कमी से पीडित हैं क्योंकि उनके शरीर में इसे अवशोषित करने की क्षमता नहीं है।

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  11. जमाल साहब,
    @ "विटामिन B 12 मिलता है केवल मांस से"

    >> यदि B 12 केवल मांस से मिलता है तो फिर शाकाहारियों के रक्त में जो B 12 की संतुलित मात्रा पाई जाती है वह B 12 कहाँ से आता है।
    @"इसकी कमी से अल्झाइमर नामक बीमारी हो जाती है"
    >> अर्थार्त सभी शुद्ध शाकाहारी अल्झाइमर से पीडित होने चाहिए!! जबकि मांसाहारियों की तुलना में शाकाहारी अधिक स्वस्थ जीवन बिताते देखे गये है।
    @अपने देशवासियों को मज़बूत और सेहतमंद बनाने के लिए हमें संतुलित आहार करना चाहिए।
    >> पोष्टिक तत्वों का संतुलन चाहिए, जो शाकाहारी पदार्थों में बहुलता से उपलब्ध है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का उससे भी कहीं अधिक ध्यान रखा जाना चाहिए।

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  12. वैसे बी 12 बहुत सी मिट्टी में भी पाया जाता है। एक समुद्री काई स्पाइरुलिना (spirulina) बी12 का सर्वोत्तम स्रोत है। भारत में डाबर इसके कैप्सूल बेचते थे - शायद अब भी बेचते हों - डॉ. साहब अगर आज तक आप बी12 की कमी के डर से मांस खाते रहे हों तो आज इसी वक्त बेधडक छोड सकते हैं। बस एक कैप्सूल स्पाइरुलिना का रोज़ लेते रहिये।

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  13. .

    अनुराग जी और हंसराज जी आपने कुतर्क के पाँव जमने से पहले ही उखाड़ दिए.
    अनुराग जी का 'अंगद पाँव' देखकर लगता है इसे कोई हिला नहीं सकता.

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  14. .

    अनुराग जी, आपने दूसरा प्रतिउत्तर गज़ब का दिया.

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  15. अनुराग जी इस विषय में सिद्धहस्त है। कमाल का शोध अध्यन है।

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  16. प्रतुल जी, सुज्ञ जी, धन्यवाद!
    पूर्ण शाकाहारी सुनोवा स्पाइरुलिना (150 रुपये में 60 गोलियाँ) यहाँ उपलब्ध है
    http://www.sunova.in/Products.aspx?id=99

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  17. जैसा कि मालूम है कि भारत को अगले बीस बरसों में एक नया और बहुत भयानक ख़तरा पेश आने वाला है। यह ख़तरा कृषि केन्द्र के डायरेक्टर के अल्फ़ाज़ में ‘बौद्धिक बौनेपन‘ का ख़तरा है। इसका मतलब यह है कि हमारी आने वाली नस्लें जिस्मानी ऐतबार से ज़ाहिरी तौर पर तो बराबर होंगी लेकिन बौद्धिक योग्यता के ऐतबार हम दुनिया की दूसरी सभ्य जातियों से पस्त हो चुके होंगे।
    यह ख़तरा जो हमारे सामने है, उसकी वजह डाक्टर स्वामीनाथन के अल्फ़ाज़ में यह है कि हमारा आहार में प्रोटीन की मा़त्रा बहुत कम होती है। यहां की आबादी एक तरह के प्रोटीन के फ़ाक़े में मुब्तिला होती जा रही है। प्रोटीन भोजन का एक तत्व है जो इनसानी जिस्म के समुचित विकास के लिए अनिवार्य है। यह प्रोटीन अपने सर्वोत्तम रूप में मांस से हासिल होता है। मांस का प्रोटीन न सिर्फ़ क्वालिटी में सर्वोत्तम होता है बल्कि वह अत्यंत भरपूर मात्रा में दुनिया में मौजूद है और सस्ता भी है।
    रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए उनके आहार को और पौष्टिक बनाने का फैसला किया है ।इस कवायद में फील्ड और पीस एरिया में तैनात जवानों को जहाँ अब हर दिन दो अंडे दिए जाएँगे ।वहीं नौ हजार फुट और उससे अधिक ऊँचाई पर तैनात जवानों को दिन में एक के बजाए दो अंडे मिलेंगे । (दैनिक जागरण 31 अगस्त 2010)
    सैनिकों की यह खुराक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद तय की जाती है देश की रक्षा में तैनात जवानों की सेहत का पूरा ध्यान सरकार को रखना पड़ता है सिर्फ शाकाहार जवानों को संतुलित आहार प्रदान नही कर सकता क्योकि इससे शरीर मे सही मात्रा में प्रोटीन की जरूरत पूरी नही हो सकती । इसलिए सरकार ही का दायित्व है कि वह जवानों के संतुलित आहार का इंतजाम करे । क्योकि प्रोटीन की कमी के कारण जवानों मे कुपोषण हो सकता है और वह युद्ध के समय मे देश व सैनिकों के लिए घातक हो सकता है । अब देश के नागरिकों का भी फर्ज है वह भी देश के लिए हर परिस्थिति के लिए हर समय तैयार रहें देश के हर समय जान देने व लेने के लिए तैयार रहें । कभी ऐसी स्थिति आने पर मांसाहार न करने के कारण प्रोटीन की कमी के कारण कुपोषण से जूझते लोग क्या करेंगे ?
    ऐसी स्थिति मे वह लोग पीठ दिखाने को विवश होंगे और पराजय का कारण भी बन सकते है । इसलिए हर व्यक्ति को प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मेन्यू अपनाने की जरूरत है । इसके लिए लोगों को अपने काल्पनिक अंधविश्वासो को बाधा नही बनने देना चाहिए ।
    कुछ लोग मांसाहार के खिलाफ दुष्प्रचार करके अपने लोगों को कमजोर बना रहें है ऐसा करके वह लोग जाने अनजाने शत्रु देश का काम आसान कर रहें है । इस को लेकर समय रहते जागने की जरूरत है अतः सभी को मिलकर देश को मजबूत बनाने के लिए मांसाहार को बढ़ावा देने की जरूरत है

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  18. DR. ANWER JAMAL साहब,

    आपने कृषि केन्द्र के डायरेक्टर डाक्टर स्वामीनाथन का हवाला देकर मांसजन्य प्रोटीन के अभाव में भारत के नागरिको के लिये ‘बौद्धिक बौनेपन‘ का ख़तरा बताया है। आपको चाहिए आप उनके अल्फ़ाजो को हूबहू सन्दर्भ सहित प्रस्तूत करें, क्योकि आज तक तो पूरा विश्व भारतीय बौधिक प्रतिभा का लोहा मानता है, और आयात करता है। यदि यह बात सिद्ध नहीं होती तो आपका यह कथन भारतीय हितों को घोर नुकसान पहूँचा सकता है।

    “रक्षा मंत्रालय ने अपने जवानों की सेहत की सुध लेते हुए………………………जवानों मे कुपोषण हो सकता है और वह युद्ध के समय मे देश व सैनिकों के लिए घातक हो सकता है ।“

    आपके इस पूरे पेरेग्राफ से विदित होता है कि सैन्य के लिये रक्षा मंत्रालय नें कोई नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें मांसाहार व अंडो को अनिवार्य घोषित किया है,यह बताकर आगे आप बताते है कि इसका पालन (अर्थार्त मांसाहार का प्रयोग) न करने पर आप लिखते है…”ऐसी स्थिति मे वह लोग पीठ दिखाने को विवश होंगे और पराजय का कारण भी बन सकते है ।“
    रक्षा मंत्रालय के इस आदेश को आप प्रमाण सहित व सारे संदर्भो सहीत पेश किजिये जिसमें मांसाहार को अनिवार्य घोषित किया गया हो,और उपयोगी सिद्ध किया गया हो। अन्यथा आपको सैन्य के आहार मामलों में भ्रम फैलाने का दोषी माना जा सकता है।
    साथ ही इसे शाकाहारी जवानों को जानबूझ कर हतोत्साहित करने का प्रयास भी माना जा सकता है।

    शाकाहार को ‘काल्पनिक अंधविश्वास’ कहकर न केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहूँचाई है बल्कि सर्वस्वीकृत स्थापित मान्य शाकाहार पर प्रश्नचिन्ह लगाकर करोडो शाकाहारियो को अंधविश्वासी कहने का दुस्साहस किया है, जिसका जवाब आपको देना होगा।

    यह तीनों स्पष्ठिकरण सरल सीधे तरीके से प्रमाण सहित आप दे दें

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  19. आदरणीय सुज्ञ जी.
    आप डॉ. अनवर जमाल(घोटा) की प्रतिक्रिया पर जवाब देकर अपनी ऊर्जा और समय व्यर्थ न किया करें. अब इन्हें कौन समझाए कि "शून्य" का अविष्कार, ज्योतिष शास्त्र इत्यादि ये सब शाकाहार करके किये गए हैं.

    भारतीय नागरिकों के बौद्धिक बौनेपन कि चिंता अरबी घोड़े क्यों कर रहे हैं ???

    इनका तो काम ही है "छिद्रान्वेषण" और "कुतर्क".

    ये तो हिंदू धर्म की किताबें पढते हैं सिर्फ उनमे कमियें निकालने के लिए. जब अपनी पूँछ पर पैर पड़ता है तब बहुत दर्द होता हैं इन्हें.



    बिना बुलाए आना और अपनी प्रतिक्रिया देना इनका प्रिय शगल है.

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  20. @ सुज्ञ जी ! आपकी ऊर्जा को हरगिज़ व्यर्थ न जाने दिया जायेगा .
    आपके लिए मैंने थोड़ी सी डिफरेंट स्टोरी लिखी है .
    हरेक सीन उसी तरह आगे बढ़ रहा है.
    कहानी के मुताबिक़ अभी आपका हौसला बढ़ाया जायेगा और यह तब होगा जबकि ...
    खैर , हम और आप बात करेंगे तभी तो शाकाहार का प्रचार होगा ?

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  21. अनवर जमाल साहब,
    डिफरेंट स्टोरी लिखतें रहें, पहले पुछे गये प्रश्नों के उत्तर तो दे दिजिए
    हम भी देखें हौसला कहां से आ रहा है? और आपका हौसला ऐसा क्यों है?

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    1. दूसरे बन्दों के लिए "डिफरेंट स्टोरी" लिखने का काम खुदाया ने बन्दों को सौंप दिया है क्या ?

      या यह जनाब अपने आप को खुदा समझने लगे हैं ?

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  22. मेरे पिता जी २८ वर्ष तक सेना में कार्य रत रहे हैं १९७१ तक मांस शराब का सेवन यदा-कदा करते थे पारिवारिक परम्परा के कारण. सेना में रहते हुए ही एक आर्यसमाजी धर्मगुरु के संपर्क से आपने दोनों का परित्याग कर दिया १९९५ में सेवा निवृत्ति तक व आज पर्यन्त सेवन नहीं किया . सेना में कोई अनिवार्यता नहीं है. दुष्टों पर क्रोध करने के लिए मांस भक्षण की कोई आवश्यकता नही है. परमात्मा दुष्टों को दण्ड देता है क्या मांस खाकर देता है. ईश्वर तो कुछ भी नहीं खाता. पुनः दंड कैसे देता है. मन्युरसी मन्यु मे धेहि. वेद का ये वचन आर्य को दुष्टों पर क्रोध करने के लिए कहता है, मांस की नही

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    1. सही कहा, दुष्टों पर क्रोध करने के लिए मांस भक्षण की कोई आवश्यकता नही है. - मन्यु के लिए तो दया और विवेकयुक्त साहस चाहिए, निर्लेप-निष्ठुर पर कर्तव्य भाव चाहिए।

      स्वादवश अंध-धारणाओं में डूबे ये माँसाहार समर्थक हमारे सैन्य के आहार मामलों में भ्रम पैदा करने का दुष्कृत्य करते है। ऐसे कृत्यों का संज्ञान लिया जाना चाहिए।

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  23. श्री राम और रावण के युद्ध (निर्णायक युद्ध) के दिन दशमी थी (जिसे हम आज भी दसहरा के रूप में मनाते हैं और रावण का पुतला जलाते हैं ) जो नवरात्रि की नवमी के बाद आती है | श्री राम चन्द्र जी नवरात्रों के उपवासों के साथ युद्ध पर थे, जबकि रावण (और उसकी सारी सेना) नियमित मांसाहार सेवन करती थी |

    नवमी के दिन देवी पूजा और फिर आयुध (शस्त्र) पूजा के बाद ही राम रावण का निर्णायक युद्ध हुआ | कृपया कोई बताएगा की उस युद्ध में मांसाहार करने वालों ने विजय पायी थी या उपवास करने वालों ने ?

    फिर यह तो सब जानते ही हैं की श्री राम जी की सेना "वानर सेना " थी | और वानर तो होते ही हैं शुद्ध शाकाहारी | वे कैसे राक्षस (मांसाहारी) सेना को हरा पाए होंगे ?

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  25. आप सभी गुरुओ के चरणों में मेरा सादर प्रणाम। अभी बहुत छोटी उम्र है पर यहाँ जितना ज्ञान आप लोगो के द्वारा प्राप्त होता है सच में किसी किताब में नही मिलता इतनी सरल भाषा में।

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