सोमवार, 31 जनवरी 2011

आदिमानव शाकाहारी थें, नवीनत्तम जानकारी


Posted by अनिल रघुराज at 18:14  Oct 192010
वैज्ञानिकों को कुछ ऐसे सुबूत मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि करीब तीस हजार साल पहले गुफाओं में रहनेवाले आदिमानव न केवल अनाज को चक्कियों में पीसते थे, बल्कि सब्जी-भाजी भी उगाते थे। इस खोज से उस प्राचीनतम साक्ष्य को ही बल मिलता है जिसके मुताबिक प्रागैतिहासिक मानव अनाज से आटा बनाते थे और संभवतः वे निएंडरथल ही थे जो अपने आहार के लिए सब्जी-भाजी उगाते थे। इटली के एक शोध संस्थान ने यह निष्कर्ष अनुसंधान के दौरान मिले प्राचीन रसोई उपकरणों वगैरह के आधार पर निकाला है। यह शोध नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के जर्नल में छपा है।
Courtesy: BBCHindi.com  मंगलवार, दिसंबर 28, 2010,12:02[IST]
निएंडरथल मानव सब्ज़ियां भी खाया करते थेआदि मानवों पर किए गए एक नए शोध के अनुसार आदिमानव (निएंडरथल) सब्ज़ियां पकाते थे और खाया करते थे.अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें निएंडरथल मानवों के दांतों में पके हुए पौधों के अंश मिले हैं.यह पहला शोध है जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि आदिमानव अपने भोजन के लिए सिर्फ़ मांस पर ही निर्भर नहीं रहते थे बल्कि उनके भोजन की आदतें कहीं बेहतर थीं.

यह शोध प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज़ में छपा है.आम तौर पर लोगों में आदि मानवों के बारे में ये धारणा रही है कि वो मांसभक्षी थे और इस बारे में कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिल चुके हैं. अब उनकी हड्डियों की रासायनिक जांच के बाद मालूम चलता है कि वो सब्ज़ियां कम खाते थे या बिल्कुल ही नहीं खाते थे.इसी आधार पर कुछ लोगों का ये मानना था कि मांस भक्षण के कारण ही हिमकाल के दौरान बड़े जानवरों की तरह ये मानव भी बच नहीं पाए.

हालांकि अब दुनिया भर में निएंडरथल मानवों के अवशेषों की जांच रासायनिक जांच से मिले परिणामों को झुठलाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मानवों के दांतों की जांच के दौरान उसमें सब्ज़ियों के कुछ अंश मिले हैं जिसमें कुछ तो पके हुए हैं.निएंडरथल मानवों के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं वहां पौधे भी मिलते रहे हैं लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं था कि ये मानव वाकई सब्ज़ियां खाते थे. जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलिसन ब्रुक्स ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘ हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे.’’

2 टिप्‍पणियां:

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    सुज्ञ जी, आपने इस पोस्ट को लगाकर पढाये जा रहे बिगड़े और भ्रमपूर्ण इतिहास पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है.
    मैं बचपन से सोचता था कि क्या हमारा विकास क्रमतर हुआ है?.. फिर सोचता था कि क्या हमारे पूर्वज पशुवध करते थे? यदि ऐसा था तो बहुत बुरा था हमारा अतीत. फिर मैं आर्य-विद्वानों के संपर्क में आया तो समझ आया कि हमारा विकास व्यतिक्रम में अधिक हुआ है. भाषा की दृष्टि से, साहित्य की दृष्टि से, पर्यावरण की दृष्टि से, अध्यात्मिक उन्नति के दृष्टि से, स्वास्थ्य की दृष्टि से, सुख-ऐश्वर्य की दृष्टि से, नियम-संयम-आचार वाले जीवन की दृष्टि से हर दृष्टि से पतन ही तो देखा है हमने. खानपान की दृष्टि से भी पतन का लक्षण ही तो है मांसाहार. भौतिक उन्नति तो लुक्का-छिप्पी का खेल ही है.

    [ एक 'तो' अतिरिक्त आ गया था इस कारण उसे निकालने के चक्कर में टिप्पणी डिलिट कर बैठा. तब तक देर हो चुकी थी. सुज्ञ जी हामी भर चुके थे. ]

    .

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    1. सुज्ञJan 31, 2011 10:15 PM

      ठीक कहा प्रतुल जी,
      मांसाहार का प्रचलन, हमारा सभ्यता से असभ्यता की ओर पतन है।

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