गुरुवार, 1 मार्च 2012

आभार प्रदर्शन


20 टिप्‍पणियां:

  1. यह हरित श्रृंखला एक दिन पूरे विश्व को अपने प्रेम पाश में आबद्ध करेगी इसी आशा के साथ मैं भी व्यक्तिगत रूप से सभी का आभार प्रकट करता हूँ!!

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    1. इस हरित क्रांति में आपकी सुदीर्घ सराहना का योगदान अनमोल है।

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  2. निरामिष परिवार के सभी बंधु, लेखक समूह, प्रकट-अप्रकट समर्थक एवं सभी पाठकों का हृदय की गहराई से अभिवादन सहित आभार!!

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  3. सर्वप्रथम तो जिनके हृदय में करूणा आ बसी उन निरामिष संकल्पवानों को सादर नमन!!
    निरामिष परिवार अर्थात् समूह के लेखक बंधुओं व समर्थकों का गुणानुवाद, उनके सहयोग के बिना यह स्वीकार्य स्थिति उपार्जित कर पाना मुस्किल था।
    ब्लॉग पर पधार कर प्रोत्साहन प्रदान करते महानुभावों का कृतज्ञता पूर्वक आभार!!
    सभी पाठको का अन्तर की गहराई से अभिवादन!!

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  4. धीरे धीरे यह कारवाँ और बढ़ेगा..

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    1. आपकी निर्मल प्रेरणा आशीष अवश्य फलद्रुप होगी।

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  5. इस सद्प्रयास को और बल मिले..... यही दुआ है.....

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    1. आपका सद्सहयोग तो विस्मृत ही नहीं होता।

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  6. भविष्य समन्वय, करुणा, अहिंसा और शाकाहार के पक्ष में है. निरामिष को तो अभी बहुत आगे जाना है, मेरी शुभकामनाएं!

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    1. जी!! हमें जाना है उन करोड़ों-करोड़ लोगों तक जिन्होने अभी तक 'जीवदया' से आत्मसन्तुष्टि का स्वाद नहीं चखा है!!

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  7. hamare liye to apni vichar aur man ko 'swakh evam nirmal' karne ka prangan hai.........

    hardik subhkamnayen....

    pranam.

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    1. आपके निरामिष प्रांगण में आने मात्र से निरामिष का हृदय सुमन खिल उठता है।

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  8. निरामिष जी , यह ब्लॉग बनाने के लिए आपके प्रति मैं अपना व्यक्तिगत आभार भी प्रकट करना चाहूंगी :)

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    1. यह हम सभी की कोमल भावनाओं का प्रतिबिंब है।

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  9. बहुत ही अच्छा चिट्ठा है, बहुत खूबसूरत लेख हैं. आप का धन्यवाद.

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    1. खूबसूरती को चार चाँद लगते है जब आपके जैसे सराहना करने वाले समीप होते है।

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  10. ब्लॉग जगत का पहला सामूहिक ब्लॉग जिसके सभी लेखक/लेखिकाएँ इस मंच पर होना डिजर्व करते हैं|
    ब्लॉग जगत का पहला सामूहिक ब्लॉग जिसमे हर पाठक की बात / सलाह पर विचार किया जाता है|
    ब्लॉग जगत का पहला सामूहिक ब्लॉग जिसमे होने वाली हर चर्चा बड़ी ही रोचक और ज्ञानवर्धक होती है|

    और ऐसा बहुत कुछ है जो कहना है ..........

    सार में कहें तो ......
    ब्लॉग जगत ही नहीं सम्पूर्ण मानव जाति सुज्ञ जी और इन बेहतरीन लेखकों के योगदान के लिए सदैव ऋणी रहेगी क्योंकि आप लोग बेजबानो के जीवन के साथ साथ संस्कृति और लोगों के स्वास्थ्य की भी सुरक्षा कर रहे हैं ...... भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ

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    1. आपने तो स्नेह, सारे तट्बंध तोड़कर उड़ेल दिया है। हम सभी उन करोडों लोगों के दिल में बसी अनुकम्पा और जीवदया के सदैव ऋणी रहेंगे।

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    2. भावना का अतिरेक नहीं ... मेरे बहुत से अन्य मित्रों का भी यही मानना है .... निरामिष से परिचय के बाद

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  11. 'निरामिष परिवार' को भी कोटि-कोटि बधाइयां और आभार! सच्चाई यही है कि 'निरामिष' सफलता के पीछे 'निरामिष' के अति विद्घान लेखकों की मेहनत और लगन ही है। समय-समय पर कुछ विद्धान पाठकों की टिप्पणियां सोने पर सुहागा जैसी होती है।

    मैं तो जब भी इस ब्लॉग पर आया हमेशा उम्मीद से ज्यादा ही पाया। 'निरामिष' का उद्देश्य अति पावन है। इसलिए ये ब्लॉग बेहद खास है। इस ब्लॉग का संदेश पूरी दुनिया में फैले ....ऐसी मेरी कामना है। आप सभी (निरामिष परिवार और उसके समर्थक एवं पाठकगण) को एक बार फिर से आपकी इस अनुपम सफलता के लिए हार्दिक आभार।

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